शाम 7 बजे ‘बोधई’ का बाटी चोखा


कुल मिला कर पूरी सेल्समैनी चाइना छाप माल बेचने में पारंगत है। सेल्समैन के गुणों के मोहजाल में स्वदेशी और राष्ट्रवाद से ओतप्रोत ग्राहक कड़क से मुलायम बनते हुये अंतत: चाइनीज पर टूटता है! आत्मनिर्भरता तेल लेने चली जाती है!

विष्णु मल्लाह – गंगा-नाव-मछली ही उसका जीवन है!


वह नाव के एक सिरे पर बैठा डांड/पतवार के साथ। दूसरी ओर उसका जाल पड़ा था। मैं नाव के फ़र्श पर बीच में बैठा। वह नाव चलाने लगा और मैं उससे उसके बारे में पूछने लगा।

नजीर मियाँ की खिचड़ी – रीपोस्ट


नजीर मियां का पूरा परिवार आम की रखवाली में लगा रहता था। जब आम का सीजन नहीं होता था तब वह साड़ियां बुनता था। औरतें धागे रंगती, सुखाती और चरखी पर चढ़ाती थीं। फिर आदमी लोग उसे करघे पर चढ़ा कर ताना-बाना तैयार करते।

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