आलसी आंख छ दशक बाद चैतन्य – देशज भाषा में छटपट – बनी! देर से ही सही, मेरी लुगाई जी पुनर्योवना हो रही हैं और हम जो हैं सो ही हैं! :-)
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सड़सठ (67) साल की उम्र पर
अपने आप को कालजयी लेखक, ब्लॉगर या कोई शानदार लीगेसी छोड़ कर जाने का फितूर न पाला जाये तो क्रियेटिव तरीके से आने वाले दशक – कई दशक – दीर्घ और स्वस्थ्य जीवन के साथ गुजारे जा सकते हैं। बाकी, जो होगा सो होगा ही। होईहैं सोई जो राम रचि राखा!
ओमप्रकाश का भूंजा – लो कैलोरी ऑप्शन
लोग सोशियो-कल्चरल व्यापकता अपना रहे हैं और मैं भुंजवा-भरसांय-भुने दाने की ओर लौटने के उपक्रम कर रहा हूं। मेरा मानना है कि दीर्घ जीवन के सूत्र में साइकिल चलाने और भूजा सेवन का महत्वपूर्ण स्थान है। इन्ही के साथ जीवन शतायु होगा।
