कहते हैं भारत ऐसा देश है जो एक साथ बीस शतब्दियों में जीता है। उस हिसाब से यह कल्पना की जा सकती है कि एक अच्छी खासी आबादी सतयुग, त्रेता, द्वापर की भी अभी होगी। मिश्रीलाल की तरह अपने सतयुगी नोश्टॉल्जिया में जीती।
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मानसिक हलचल – ब्लॉग लोगो डिजाइन के बहाने कथ्य
मैंने ब्लॉग पर जितना समय ब्लॉग-पोस्ट लेखन में लगाया है; उससे कम ब्लॉग के सौंदर्य और प्रस्तुति की छवि में नहीं लगाया होगा। पंद्रह साल मेंं ब्लॉग से कमाई शून्य है, पर उसके प्रति आसक्ति बहुत है।
ईंटवाँ गंगा घाट पर नित्य स्नान करने वाला लालचंद
वह एक तौलिया पहने है। हाथ में कचारा हुआ कपड़ा और कांधे पर लुंगी। घर से एक लाठी और तौलिया भर ले कर आता होगा गंगा स्नान के लिये। बाकी, नहाने-सुखाने और कपड़ा कचारने का काम तो गंगा किनारे होता है। उसके पैरों में चप्पल भी नहीं है।
