भूसा और खबर


सवेरे साइकिल-सैर में जाते हुये पाया था कि उस खेत में थ्रेशिंग के बाद गेंहूं वहां से हटाया जा चुका था। भूसा भी एक ट्रेक्टर-ट्रॉली में ट्रॉली की ऊंचाई तक लादा जा चुका था। बाकी बचा अधिकांश भूसा झाल (पुरानी धोती-साड़ी के बोरों) में इकठ्ठा कर दिया गया था। चहल पहल थी वहां। लग रहाContinue reading “भूसा और खबर”

मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस


मानिक सेठ की महराजगंज, जिला भदोही में किराने की दुकान है। नोटबन्दी के बाद उनकी पहली दुकान थी, जहां मैने कैशलेस ट्रांजेक्शन का विकल्प पाया। पच्चीस नवम्बर की शाम थी। नोटबन्दी की हाय हाय का पीक समय। वे पेटीएम के जरीये पेमेण्ट लेने को तैयार थे। मैने अपने मोबाइल से पेमेण्ट करना चाहा पर इण्टरनेटContinue reading “मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस”

श्यामबिहारी, चाय की दुकान पर


कटका स्टेशन पर अरुण की छोटी-सी चाय की गुमटी है। आज वहीं मिले श्यामबिहारी। परिचय देते समय उन्होंने यह नहीं बताया कि वे किसान हैं। सबसे पहले बोले—”बाईस साल बंबई में रहे। मिस्त्री का काम किया।” फिर बताया कि अब दोनों बेटे बंबई में हैं। वही काम करते हैं। अब ठेका लेने लगे हैं। पहलेContinue reading “श्यामबिहारी, चाय की दुकान पर”

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