कई शब्द नितांत पारिवारिक होते हैं। विवेक शानभाग का एक नॉवेल्ला है – घाचर घोचर। मुझे यह पसंद है क्यूं कि इसमें वातावरण नितांत निम्न मध्यवर्ग से शुरू होता है। बहुत कुछ वैसा जिससे अपने को मैं जोड़ पाता हूं। घाचर घोचर किसी डिक्शनरी में नहीं मिलेगा। कन्नड़ भाषाकोश में भी नहीं। अब शायद इसContinue reading “घोड़मुतवा”
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ठल्लू के चूल्हे का एक चित्र
<<< ठल्लू के चूल्हे का एक चित्र >>> सवेरे कोहरा मामूली था। पत्नीजी और मैं बगल में रहते ठल्लू के घर तक यूं ही चले गये। उसके आंगन में एक ओर कोने में कऊड़ा जल रहा था। उसके आसपास बैठी उसकी पतोहू और छोटी लड़की सब्जी काट रही थीं। पतोहू के गोद में महीने भरContinue reading “ठल्लू के चूल्हे का एक चित्र”
साक्षी माला – जप करने की ओर
अब, इतनी जिंदगी बीत जाने के बात पता चला कि रुद्राक्ष की 108 जप की माला के साथ एक साक्षी-माला का विधान है। इस माला में 20 मनके होते हैं जो मोटे धागों की लड़ी से गुंथे होते हैं। यह माला खुली होती है – एक लकीर की तरह।
