मेरी रेलवे की यादों को कुरेदती फिल्म भुवन शोम


मैं अपने तनाव, शरीर और मन की उपेक्षा और रोज रोज की चिख चिख से अपने को असम्पृक्त नहीं कर सका। अगर वह सीख लेता – और उसके प्रति सचेत रहता – तो आज कहीं बेहतर शारीरिक/मानसिक दशा में होता।

एक शाम, न्यूरोलॉजिस्ट के साथ


तय हुआ था कि मैं न्यूरोसर्जन से छ बजे मिलूंगा और उन्हे ले कर अपने घर जाऊंगा अपनी अम्मा जी को दिखवाने। सवा छ बज रहे थे। मैं 15 मिनट से बाहर बैठा प्रतीक्षा कर रहा था कि डा. प्रकाश खेतान अपना कार्य खत्म कर उपलब्ध होंगे मेरे साथ चलने को। पर वहां बहुत सेContinue reading “एक शाम, न्यूरोलॉजिस्ट के साथ”

डा. प्रकाश खेतान, न्यूरोसर्जन


मेरी अम्माजी अस्पताल में हैं। उनकी कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण उनका ऑपरेशन हुआ है। चुंकि वे दशकों से खून पतला करने के लिये नियमित दवाई लेती रही हैं; ऑपरेशन के पहले उनकी यह दवा रोक कर उनके रक्त का प्रोथ्रोम्बाइन टाइम ऑपरेशन के लिये वांछित स्तर पर लाया गया। इसके लिये दवा लगभग एकContinue reading “डा. प्रकाश खेतान, न्यूरोसर्जन”

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free