मुराहू पण्डित के साथ साइकिल से गंगा घाट


मंदिर छोटा है, पर पुराना है और अच्छा लगता है। उस मंदिर की चारदीवारी बनाने की कथा भी पण्डित जी ने बतायी। ईंटवाँ के ही फलाने जी का छ क्विण्टल गांजा पकड़ा गया था। उस मामले में बरी होने पर उन फलाने जी ने यह जीर्णोद्धार कराया।

विक्षिप्त पप्पू


पप्पू से कोई बात करता हो, ऐसा नहीं देखा। वह आत्मन्येवात्मनातुष्ट: ही लगता है। हमेशा अपने से ही बात करता हुआ। दार्शनिक, सिद्ध और विक्षिप्त में, आउटवर्डली, बहुत अंतर नहीं होता। पता नहीं कभी उससे बात की जाये तो कोई गहन दर्शन की बात पता चले।

छब्बीस जनवरी की जलेबी खरीद


घर पर हमारे ड्राइवर साहब ने एक बांस की लम्बी डण्डी छील कर तैयार की। उसपर झण्डा लगा कर घर के ऊपर कोने पर सुतली से सीढ़ी के रेलिंग से झण्डा बांध कर फहराया। सब को जलेबी बांटी गयी। देशभक्ति की ड्रिल सम्पन्न हुई।

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