दउरी बनाने वालों का बाजार


संक्रांति के अवसर पर हम लाई, चिवड़ा, गुड़ की पट्टी, तिलकुट, रेवड़ी, गुड़ का लेड़ुआ और गजक जैसी चीजें खरीदने के लिये महराजगंज बाजार गये थे। वहां गिर्दबड़गांव की धईकार बस्ती के संतोष दिखे। एक साइकिल पर बांस की दऊरी लटकाये थे।

महराजगंज कस्बे का मोची – जमुना


जमुना जूता-चप्पल की मरम्मत करते हैं। उसके अलावा तल्ले बाहर से मंगवा कर उनपर जूता बनाने का भी काम करते हैं। मैंने उनसे दो तीन जोड़ी चप्पलें ली हैं। काफी मजबूत हैं।

संदीप कुमार को एक व्यवसाय और, उससे ज्यादा, आत्मविश्वास चाहिये #गांवकाचिठ्ठा


नौकरी में दिक्कत है, व्यवसाय के लिए पूँजी की किल्लत है। संदीप के यह बताने में निराशा झलकती है। पर मेरा आकलन है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी है। उसको प्रोत्साहित करने वाले नहीं मिलते उसके परिवेश में।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free