यह सौभाग्य है कि डा. अशोक सिंह अपने संस्मरण सुनाने को राजी हो गये। आज उस कड़ी में पहला पॉडकास्ट है जिसमें वे अगियाबीर की खोज की बात बताते हैं। उनके संस्मरण बहुत रोचक हैं। आप कृपया सुनने का कष्ट करें।
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आई.सी.यू. में गांव की पोखरी
वे जल क्षेत्र जो गांव की आबादी के बीच हैं; उनकी दशा ज्यादा खराब है। उनमें से इस गांव – विक्रमपुर की पोखरी तो आई.सी.यू. में ही है। ज्यादा जीने की उम्मीद नहीं लगती। और आजकल उसे ले कर गांव के स्तर की राजनीति भी खूब हो रही है।
नजीर मियाँ की खिचड़ी – रीपोस्ट
नजीर मियां का पूरा परिवार आम की रखवाली में लगा रहता था। जब आम का सीजन नहीं होता था तब वह साड़ियां बुनता था। औरतें धागे रंगती, सुखाती और चरखी पर चढ़ाती थीं। फिर आदमी लोग उसे करघे पर चढ़ा कर ताना-बाना तैयार करते।
