मेरे इन्स्पेक्टर श्री एस पी सिंह मेरे साथ थे और दिल्ली में मेरे पास डेढ़ घण्टे का खाली समय था। उनके साथ मैं निर्माण भवन के आसपास टहलने निकल गया। रेल भवन के पास ट्रेफिक पुलीस वाले की अन-सिविल भाषा में सलाह मिली कि हम लोग सीधे न जा कर मौलाना आजाद मार्ग से जायें।Continue reading “बत्तीस साल पहले की याद।”
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कन्नन
कन्नन मेरे साथ चेन्नै में मेरे गाइड और सहायक दिये गये थे। छब्बीस और सताईस अक्तूबर को भारतीय रेलवे के सभी १६ जोनल रेलवे के चीफ माल यातायात प्रबंधकों की बैठक थी। उस बैठक के लिये उत्तर-मध्य रेलवे का मैं प्रतिनिधि था। मेरे स्थानीय सहायक थे श्री कन्नन। दक्षिण में भाषा की समस्या होती हैContinue reading “कन्नन”
माधव सदाशिव गोलवलकर और वर्गीज़ कुरियन
वर्गीज़ कुरियन की पुस्तक – ’आई टू हैड अ ड्रीम’ में एक प्रसंग माधव सदाशिवराव गोलवलकर ’गुरुजी” के बारे में है। ये दोनों उस समिति में थे जो सरकार ने गौ वध निषेध के बारे में सन् १९६७ में बनाई थी। इस समिति ने बारह साल व्यतीत किये। अन्त में मोरारजी देसाई के प्रधानमन्त्रित्व केContinue reading “माधव सदाशिव गोलवलकर और वर्गीज़ कुरियन”
