“ऐसे तुरत फुरत में थोड़े ही बता सकता हूं। आपको चार पांच दिन बैठना होगा सुनने के लिये। परिवार पालने के लिये अस्सी रुपया महीने में रिक्शा चला चुका हूं। कर्जा पाटने के लिये एक समय था जब गांजा भी बेचा है।”
Category Archives: Surroundings
विस्थापित – न घर के न घाट के
अपने गांव के चमरऊट को मैं गरीब समझता था। पर इनकी दशा तो उनसे कहीं नीचे की है। उनके पास तो घर की जमीन है। सरकार से मिली बिजली, चांपाकल, सड़क और वोट बैंक की ठसक है। इन विस्थापितों के पास वह सब है? शायद नहीं।
बिटिया आई थी, वापस गई
बस, वह चली जाती है। हम अंग्रेजी तरीके से हाथ हिलाते हैं।
वह आई और चली गयी। बेटियाँ आती ही जाने के लिये हैं!
