रिटायरमेण्ट के बाद जब मित्र भी नहीं बचते (शहर के मित्र शहर में छूट गये, गांव के अभी उतने प्रगाढ़ बने नहीं) तो पठन ही मित्र हैं। दिन भर लिखा पढ़ने में बहुत समय जाता है। पर बहुत व्यवस्थित नहीं है पठन। गांव में अखबार वाला समाचारपत्र बड़ी मुश्किल से देता है। पत्रिकायें नहीं मिलतीं।Continue reading “पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?”
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जंगल की वनस्पतियों पर शोध ग्रंथ
मैने श्री प्रवीण चन्द्र दुबे से उनके शोध कार्यों पर लिखी उनकी पुस्तकों पर जिज्ञासा जताई थी। कुछ दिनों बाद मुझे एक अनजान नम्बर से फोन आया। बोटानिकल सर्वे ऑफ इण्डिया के सेण्ट्रल रीजनल सेण्टर, इलाहाबाद से श्री अर्जुन तिवारी फोन पर थे। उन्होने बताया कि कुछ समय बाद वे अपने विन्ध्य की वनस्पतियों परContinue reading “जंगल की वनस्पतियों पर शोध ग्रंथ”
डेण्टिस्ट से एक अप्वॉइण्टमेण्ट
मैं पॉल थरू की दूसरी यात्रा पुस्तक – द घोस्ट ट्रेन टू द ईस्टर्न स्टार पढ़ रहा था। पॉल थरू अंकारा में अपने दांत की एक लूज फिलिंग के इलाज के लिये डेण्टिस्ट के पास गये थे। सामान्यत: डेण्टिस्ट के पास जाने की बात किसी ट्रेवलॉग में बहुत बारीकी से नहीं लिखी जायेगी। पर पॉलContinue reading “डेण्टिस्ट से एक अप्वॉइण्टमेण्ट”
