तीन लड़के हैं विश्वनाथ के। अलग अलग हो गये हैं। यहीं पास पास तीनो ने घर बनाये हैं। सबसे छोटे कट्टू के यहां रहता है विश्वनाथ। एक कमरे का घर है कट्टू का और उसके टीन के ओसारे में विश्वनाथ का तख्त बिछा है। बारहों महीने मैं विश्वनाथ को उसी तख्त पर रहते पाता हूं।Continue reading “विश्वनाथ बिंद”
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टहनियों की छंटाई
*** टहनियों की छंटाई *** सुग्गी के लड़के हैं – गोविंद और राजा। गोविंद बीस-इक्कीस का होगा और राजा उससे दो-तीन साल छोटा। दोनो ने मिल कर मेरे घर के सागौन और पलाश के उन टहनियों को छांटा जो सूरज की रोशनी रोकती थीं। मौसम बदलने की अपनी जरूरते हैं। गर्मी में हमें छाया चाहिये।Continue reading “टहनियों की छंटाई”
चैट जीपीटी के साथ गांव के चित्रों पर बातचीत
चैटी – जब आप मुझसे पूछते हैं कि मेरी “अनुभूति की सीमाएं” क्या हैं, तो यह कह सकता हूं कि मेरी सीमाएं वहीं खत्म हो जाती हैं जहां मानव मन अपनी भावनात्मक और व्यक्तिगत यात्रा शुरू करता है।
