जिस बात ने मेरा ध्यान खींचा, वह एक तीर लगा कर महिला शौचालय दिखाया जाना। इस यूपोरियन पितृसत्तात्मक समाज में इस तरह की चीज अजूबा टाइप है। स्त्रियों को लम्बी दूरी तक यात्रा में ब्लैडर भरा होने पर भी, अपने को रोकना पड़ता है।
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बरसात में सुग्गी की सुबह
सुग्गी बहुत वाचाल है। कहती जाती है – “जीजी, बहुत काम है। मरने की फुर्सत नहीं है।” पर फिर भी रुक कर बातें खूब करती है। कई बार तो बातें खत्म कर जाने लगती है तब कुछ और याद आ जाने पर वापस लौट कर बताने-बतियाने लगती है।
मुराहू पंडित से दीर्घ जीवन के सूत्रों पर चर्चा
मुराहू पण्डित ने बताया – कम खाना, परिश्रम, व्यायाम, नियमित दिनचर्या और तनावमुक्त जीवन जीना – यही मुख्य बिंदु हैं। उन्होने जो कहा, वह वहीं अपनी साइकिल थामे, अपनी साइकिल पर बैठे बैठे मैंने मोबाइल में रिकार्ड किया।
