गांव में नहर की बगल में नटों के घर हैं। उनकी औरतें ये कीड़े निकालती हैं। जिस ओर के दांत में दर्द हो, उस ओर के कान में दवा डालती हैं और कान की तरफ सिर झुकाने पर दांत के कीड़े कान से निकलते हैं। कीड़े निकलने के पांच दस मिनट बाद ही आराम हो जाता है।
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साण्डा – धान की खेती
किसानों ने मुझे बताया कि साण्डा की पैदावार का धान ज्यादा स्वस्थ होता है; चावल के दाने बड़े होते हौं और धान की कुटाई में चावल टूटता बहुत कम है। पर साण्डा वाली खेती मेहनत मांगती है।
आई.सी.यू. में गांव की पोखरी
वे जल क्षेत्र जो गांव की आबादी के बीच हैं; उनकी दशा ज्यादा खराब है। उनमें से इस गांव – विक्रमपुर की पोखरी तो आई.सी.यू. में ही है। ज्यादा जीने की उम्मीद नहीं लगती। और आजकल उसे ले कर गांव के स्तर की राजनीति भी खूब हो रही है।
