गांवदेहात की पार्वती न केवल खुद अपने पैरों पर खड़ी है, वरन अपने साथ 5-6 अन्य को भी रोजगार दिला रही है। क्या खूब बात है! हेलो प्रधानमंत्री जी; आर यू लिसनिंग!
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ओम प्रकाश यादव वाचमैन
अब तनख्वाह के रूप में कुछ कम मिलता है। पर ट्रक वाले, भले ही खाना नहीं खाते ढाबे पर, रात में आराम के लिये आसपास रुकने लगे हैं। अधिकतर वे अपना खाना खुद बनाते हैं। पर उनके ट्रकों की देखभाल का काम करते हैं ओमप्रकाश।
रस्सी बनाने की मशीन – गांव की आत्मनिर्भर सर्क्युलर इकॉनॉमी का नायाब उदाहरण
मोटर साइकिल पर लदी वह गियर सिस्टम वाली रस्सी बुनने की मशीन, हैण्डल घुमाने वाला बच्चा और रस्सी बुनने वाला वयस्क – ये तीन मुख्य घटक थे। इन तीनों के योग से कितनी शानदार रस्सी बनाने की मोबाइल दुकान बन गयी थी।
