ठेले पर मेरठ की नानखटाई


ठेले पर एक भट्टी जैसा उपकरण जिसमें नानखटाई बनती है। उसपर रिकार्ड की आवाज लाउड स्पीकर पर बजती रहती है। विज्ञापन वाली महिला और पुरुष का संवाद। औरत कहती है कि उसे मेरठ वाली नानखटाई खानी है। कुछ इस अन्दाज में कि उसका बालम मेरठ जा कर लाये उसके लिये नानखटाई।

मैं नहीं जानता था कि मेरठ की नानखटाई मशहूर है। इसी रिकार्डेड जिंगल से पता चला। आदमी की आवाज आती है कि अभी लाता हूं। यानी केवल ठेले तक जाना है नानखटाई लाने के लिये। अपने शहर, अपने कस्बे में ही उपलब्ध है।

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गोधना का शिव मंदिर – सारनाथ


यह, गोधना गांव, जिला मिर्जापुर, उत्तरप्रदेश में आर्कियॉलॉजिकल सर्वे का प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेण्ट है। देखने में 10-11वीं सदी का मंदिर नजर आता है। कभी किसी आक्रांता (?) ने इसकी सभी मूर्तियां खण्डित कर दीं। आधुनिक काल में इसका पुनर्स्थापन हुअ। कगूरा नया बना है – तो माना जा सकता है कि कगूरा तोड़ दिया गया था। मंदिर की बाहरी दीवारों पर जो नक्काशी है, वह बहुत सीमा तक बरकरार है – उसमें मूर्तियां लगभग नहीं उकेरी गयी थीं। सो आक्रांताओं ने उसको तोड़ने में अपनी ऊर्जा नष्ट नहीं की।

मंदिर के समक्ष नंदी की खण्डित प्रतिमा।

छोटा और बहुत सुंदर मंदिर है यह। इसका ढांचा कायम है – यही गनीमत। अब एएसआई के सौजन्य से परिसर का सौंदर्येकरण कर दिया गया है। साफ सफाई उपयुक्त है और पण्डा लोगों का अतिक्रमण नहीं है।

यह सारनाथ मंदिर कहाता है – पर यह शिव मंदिर है; बौद्ध तीर्थस्थल सारनाथ नहीं। यह मिर्जापुर जिले में है। वाराणसी में नहीं।

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रिटायर्ड जिन्दगी की सुबह


जल्दी उठ गया हूं। जल्दी माने 4 बजे नहीं, ढ़ाई बजे। पास के बिस्तर पर पिताजी आधी रजाई नीचे गिरा चुके हैं बिस्तर से। आधी रजाई में उस मुद्रा में सो रहे हैं जिसमें मेरी दादी की कोख में रहे होंगे। मैं उनकी लापरवाही (या उनके बुढ़ापे) पर दांत पीसता हूं और उनकी रजाई उन्हें उढ़ाता हूं।

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