दांये चलो, सेफ चलो


मैंने अपने को यह माना है कि मैं साइकिल पर नहीं, पैदल चल रहा हूं। तेज चाल से चलता पैदल व्यक्ति। पैदल आदमी सड़क के दांयी ओर चलता है जिससे वह सामने आ रहे वाहन से अपने को बचा सके। सो मैं अपनी साइकिल दांयी ओर ही चलाने का प्रयास करता हूं।

लॉकडाउन काल में सवेरे का साइकिल व्यायाम


वृद्धावस्था जैसे जैसे हावी होगी, वैसे वैसे साइकिल पर घूमना, देखना, लिखना शायद संकुचित होता जाये। जब तक यह एक्रोबैटिक्स चल रही है, तब तक चलाने का पूरा मन है। जीवन का रस कस कर निचोड़ना है, जीडी!

लिखूं, या न लिखूं किताब उर्फ़ पुनर्ब्लागरो भव:


मेरे साथ के ब्लॉगर लोग किताब या किताबें लिख चुके। कुछ की किताबें तो बहुत अच्छी भी हैं। कुछ ने अपने ब्लॉग से बीन बटोर कर किताब बनाई। मुझसे भी लोगों ने आग्रह किया लिखने के लिये। अनूप शुक्ल ने मुझे ब्लॉग से बीन-बटोर के लिये कहा (यह जानते हुये कि किताब लिखने के बारेContinue reading “लिखूं, या न लिखूं किताब उर्फ़ पुनर्ब्लागरो भव:”

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