दौलतपुर से देवास


अच्छा लगा! यह रुक्ष कांवर यात्री मुझसे हास्य और विनोद का आदान-प्रदान करने की ओर खुला तो सही! आपसी सम्बंधों की बहुत सी बर्फ हम तोड़ चुके हैं। कई बार प्रेमसागर मुझसे झिड़की खा कर भी बुरा नहीं माने हैं। मेरी नसीहतें भले ही न मानी हों पूरी तरह; पर अवज्ञा का भाव कभी नहीं था। और अब यह हंसी ठिठोली – महादेव सही रूपांतरण कर रहे हैं अपने चेले का!

दौलतपुर के जंगल का भ्रमण


मसलन वन अधिकारी भी जंगल के वृक्षों में 5-10 को पहचानते हैं। यह तो वैसा ही हुआ कि घरनी को घर की चिंता ही नहीं है। महिला अपने एक दो बच्चों को नाम ले कर बुलाये और बाकी को सतकटा कह कर निपटा दे तो उस परिवार का भगवान ही मालिक।

आष्टा से दौलतपुर – जुते खेत और पगला बाबा


सवेरे समय से निकलना। रास्ते को देखते चलना। पगला बाबा से मुलाकात और सांझ ढलने के पहले मुकाम पर पंहुच जाना – बहुत बढ़िया चले प्रेमसागर! ऐसे ही चला करो, दिनो दिन। तब तुम पर खीझ भी नहीं होगी। प्रेम पर प्रेम बना रहेगा।

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