लॉक डाउन : महा भीर बैन्कन के द्वारे


जो लाइन लगी है, वह केवल खाते से पैसा निकालने के लिये नहीं है। बहुत से तो मात्र यह जानना चाहते हैं कि खतवा में पईसवा आइ कि नाहीं (खाते में पैसा आया है या नहींं)।

नदी का जल सचमुच साफ हुआ है


इन सभी चित्रों में जो चीज कॉमन है, वह है गंगाजी की स्वच्छ और प्रचुर जल राशि। जल वास्तव में आँखों को प्रिय लग रहा है!

लॉकडाउन में गुन्नीलाल – गांव के सखा


कल सवेरे साइकिल से उनकी ओर गया। गुन्नीलाल जी हमेशा बाहें फैला कर गले मिलते थे – यही हमारा नॉर्मल मोड ऑफ अभिवादन था। पर कल कोरोनावायरस काल में उन्होने दूर से नमस्कार कर स्वागत किया। घर के बाहर नीम के पेड़ के नीचे हम बैठे भी सोशल डिस्टेंसिंग के नॉर्म का विधिवत पालन करते हुये।

कोरोना के आंकड़े अब घूरने लगे हैं


अब लोग हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन या रेमडेसिविर (remdesivir) जैसे टंगट्विस्टर दवाओं के नामों का उच्चारण करने लगे हैं। अब यह नहीं कहते कि गर्मी बढ़ते ही कोरोना गायब हो जायेगा। या फिर दो-चार महीनों में इसका टीका ईजाद हो जायेगा।

गाँव के संदर्भ में लॉकडाउन क्या है?


लॉकडाउन तो तब कहा जाये जब घर ऐसा हो, जिसपर लॉक हो/लग सकता हो। गांव में वैसे घर गिनती के हैं।

आनेवाले कल की कुलबुलाहट – रीता पाण्डेय


उम्मीद करती हूं कि यह ऑनलाइन व्यवस्था आगे तेज गति से बढ़ेगी। ऑनलाइन पढ़ाई गरीब-अमीर-शहर-देहात के दायरे तोड़ने में क्रांतिकारी परिवर्तन लायेगी।