सत्तर साल के जीडी को क्या करना चाहिए


इस उम्र में पहली समझ यह बनती है कि संख्या से लड़ना व्यर्थ है। “जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिसमें,बंदों को गिना करते हैं, तोला नहीं करते।” — इकबाल की नज़्म का हिस्सा। भारत में अपीज़मेंट—तुष्टिकरण—की राजनीति है।कभी “ब्राह्मण भारत छोड़ो” जैसे नारे सुनाई देते हैं।जहाँ उम्मीद होनी चाहिए, वहाँ मायूसी है।शिक्षा लचर है; न्यायपालिकाContinue reading “सत्तर साल के जीडी को क्या करना चाहिए”

किरीट सोलंकी के चित्र


पचहत्तर की उम्र। शारीरिक समस्यायें। जीवन साथी का विछोह। और अनुभवों का एक लम्बा कालखण्ड! किरीट जी अगर सम्पर्क में रहे हो सोचने और लिखने को बहुत कुछ होगा। रेलवे भी उसमें हो उसमें शायद!

राजमणि राय और उम्र का एकाकीपन


उनकी बातों से लगा कि वे मेरी सिम्पैथी चाहते हैं पर अकेले जीने में बहुत बेचारगी का भाव नहीं है। राजमणि ने अकेले जिंदगी गुजारने के कुछ सार्थक सूत्र जरूर खोज-बुन लिये होंगे। इन सज्जन से भविष्य में मिलना कुछ न कुछ सीखने को देगा।

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