माई पर विश्वास की यह आस्था तर्क के परे की चीज है। दर्शन तो उन दोनो ने भी किये होंगे। और वे परोपकार भी कर रहे थे इन्हें साथ बिठा कर लाने में। पर वे चले गये ऊपर। … वैसे ऊपर जाना बेहतर था या इस भवजगत में खटना?
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प्रेम कांवरिया जी आज मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जायेंगे
शिव भक्त होते ही हाफ मैण्टल हैं। वे ही इतना जुनून भरा काम कर सकते हैं। बाकी लोग तो जोड़-बाकी, किंतु-परंतु करने में ही अटक जाते हैं। और प्रेम जी जैसों के लिये शिव जी ब्रह्मा का लिखा भी उलट देते हैं।
विन्ध्याचल और नवरात्रि
चैत्र माह की नवरात्रि। नौ दिन का मेला विन्ध्याचल में। विन्ध्याचल इलाहाबाद से मुगलसराय के बीच रेलवे स्टेशन है। मिर्जापुर से पहले। गांगेय मैदान के पास आ जाती हैं विन्ध्य की पहाड़ियां और एक पहाडी पर है माँ विंध्यवासिनी का शक्तिपीठ। जैसा सभी शक्तिपीठों में होता रहा है, यहाँ भी बलि देने की परम्परा रहीContinue reading “विन्ध्याचल और नवरात्रि”
