मेरे समधी, रवींद्र कुमार पाण्डेय का कोरोना संक्रमण और उबरना


“यह तो कोरोना है, जिसकी न कोई दवा है न कोई पुख्ता इलाज। बस देख सँभल कर चलना रहना ही हो सकता है। जिस तरह के कामधाम मैं हम हैं वहां अकेले एकांत में तो रहा नहीं जा सकता। लोगों से सम्पर्क तो होगा ही। गतिविधि तो रहेगी ही। बस, बच बचा कर वह कर रहे हैं।”

धनी कैसे व्यवहार करते हैं


आने वाले समय में जहां गंगा किनारे मड़ई में रहने वाले किसान और मछेरे की जिन्दगी के बारे में देखना, लिखना चाहूंगा, वैसे ही तिवारी जी और पाण्डेय जी जैसे लोगों को देखने, समझने और उनपर लिखने का अवसर भी तलाशता रहूंगा।

विन्ध्याचल और नवरात्रि


चैत्र माह की नवरात्रि। नौ दिन का मेला विन्ध्याचल में। विन्ध्याचल इलाहाबाद से मुगलसराय के बीच रेलवे स्टेशन है। मिर्जापुर से पहले। गांगेय मैदान के पास आ जाती हैं विन्ध्य की पहाड़ियां और एक पहाडी पर है माँ विंध्यवासिनी का शक्तिपीठ। जैसा सभी शक्तिपीठों में होता रहा है, यहाँ भी बलि देने की परम्परा रहीContinue reading “विन्ध्याचल और नवरात्रि”