भरसायँ, जगरन और कंहारों की चर्चा


कंहारों का पुश्तैनी पेशा कुंये से पानी खींचना, तालाब से गाय-गोरू के लिये पानी लाना, पालकी ढोना और दाना भूनने के लिये भरसाँय जलाना है। इनमें से कई काम बदलती तकनीक ने उनसे छीन लिये हैं।

उमाशंकर यादव उर्फ घुमई


घुमई को चलने में दिक्कत है, वर्ना वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। “भगवान ई शरीर सौ साल जियई बदे बनये हयें (भगवान ने यह शरीर 100 साल जीने के लिये बनाया है)।” यह कहते हुये जीवन के प्रति उनका प्रबल आशावाद झलकता है।

क्या लिखोगे पाँड़े, आज?


आगे तीन बालक दिखे सड़क किनारे। ताल में मछली मारे थे। छोटी छोटी मछलियाँ। ताल का पानी एक छोटे भाग में सुखा कर पकड़ी थीं। आधा घण्टा का उपक्रम था उनका। अब वे आपस में पकड़ी गयी मछलियों का बंटवारा कर रहे थे।

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