प्रेमसागर – बोडेली से डभोई


ब्लॉग:- प्रेमसागर – बोडेली से डभोई
जब वे बोडेली से डभोई के लिये निकले तो सड़क पर करीब पचास लोग उन्हें विदा करने के लिये जमा थे। कोई उन्हें फूल माला पहना कर विदा कर रहे थे और किसी ने तो उनकी आरती भी की।

छोटा उदयपुर से आगे, पालिया, बोडेली


आज और कल रास्ते के जो चित्र भेजे हैं, उनसे गुजरात की समृद्धि भी झलकती है। जिस इलाके से प्रेमसागर गुजर रहे हैं, वह शहरी कम है। पर ग्रामीण इलाके का भी रूरर्बियाइजेशन खूब दिखता है। उसे वे पर्याप्त अभिव्यक्त नहीं कर सके पर पालिया में कपास की फैक्टरी; सड़क के बीच पढ़ते बच्चों की मूर्ति; टॉवर आदि बताते हैं कि समृद्धि कैसी है।

प्रेमसागर, गुजरात, छोटा उदयपुर और पालिया


मुझे आशंका थी कि प्रेमसागर की यात्रा अनजान-गुमनाम होगी, पर वैसा नहीं है। लोग उन्हें जानने वाले हो गये हैं। पैदल चलने की तपस्या की जन मानस में गहरे प्रभाव डालती है। चाहे-अनचाहे प्रेमसागर आईकॉन बनते जा रहे हैं।

तीन राज्यों की सीमा छूने के बाद अब गुजरात में प्रेमसागर


कल प्रेमसागर नर्मदा के उस स्थान पर स्नान कर आये जहां मध्यप्रदेश, महाराष्ट और गुजरात की सीमायें मिलती हैं। ट्रिपल स्टेट बॉर्डर। नर्मदा किनारे पहाड़ियां थीं। जल राशि खूब और स्वच्छ। लगभग निर्जन क्षेत्र।

अलीराजपुर में भाग्वत कथा


आज प्रेमसागर को अलीराजपुर से आगे निकलना था। पर एसडीओ साहब उन्हें साठ किलोमीटर दूर, नर्मदा तट पर वह स्थान दिखाने ले गये हैं, जहां उत्तर तट पर मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा मिलती है। नर्मदा के उसपार महाराष्ट्र है। अर्थात वह स्थान है जहां नर्मदा माई तीन राज्यों की सीमायें छूती हैं।

प्रेमसागर – एक और दिन अलीराजपुर में


वैसे सर्दी बढ़ रही है – उस इलाके में भी। सवेरे के उनके चित्रों में लोग गरम कपड़े लिये दिखते हैं। शायद प्रेमसागर ने तड़के निकल पड़ने में अपने वस्त्रों और सर्दी का ध्यान नहीं रखा। तभी हरारत या बुखार हुआ होगा।