इम्फाल — आर्मचेयर ट्रेवलॉग की सम्भावनाएँ


हरि प्रकाश मिश्र और उनकी पत्नी आकांक्षा अपने बेटे के साथ इम्फाल में हैं। आकांक्षा, मेरी बहन की बड़ी बिटिया है, और मेरी पत्नीजी के साथ वहाँ के अनुभव साझा करती रहती है। तस्वीरों में देखता हूँ—उनका बेटा अब बड़ा हो रहा है। छोटी साइकिल चलाता है, हाथ में किताब लिये घूमता है। मैं कल्पनाContinue reading “इम्फाल — आर्मचेयर ट्रेवलॉग की सम्भावनाएँ”

जोखन: एक साइकिल मेकैनिक और गांव के मौन इतिहास का वाहक


कटका स्टेशन की पगडंडी पर चलते हुए मैं अक्सर लोगों के चेहरे देखता हूँ — कुछ जल्दी में, कुछ यूँ ही चलते हुए, कुछ अपनी-अपनी मुश्किलों में खोये हुए। पर इस बार जो चेहरा रुका, वह था जोखन।एक साधारण-सा आदमी।या पहली नज़र में साधारण-सा दिखता आदमी। धूप में थोड़ा सिकुड़ा चेहरा। सफेद होती दाढ़ी। ग्रीसContinue reading “जोखन: एक साइकिल मेकैनिक और गांव के मौन इतिहास का वाहक”

बिना शब्दों के मेरी बिजली की साइकिल का प्रशंसक


सवेरे के पौने नौ बजे थे। द्वारिकापुर गंगा-घाट से लौटते समय धूप कुछ उनींदी-सी थी। जनवरी की सुबहें वैसी ही होती हैं—आधी जागी, आधी सपनीली। बिजली की साइकिल पर चलते हुए मुझे हमेशा लगता है कि खेतों की हवा खुद रास्ता बनाती है, और हम बस उसके साथ बहते हैं। मकर-संक्रांति की गंवई भीड़, गंगाContinue reading “बिना शब्दों के मेरी बिजली की साइकिल का प्रशंसक”

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