उस शाम हम (राजन भाई और मैं) फिर कमहरिया के लिये साइकल पर निकले। शाम का समय था। यह सोचा कि आधा घण्टा जाने, आधा घण्टा आने में लगेगा। वहां आधे घण्टे रहेंगे व्यास जी के आश्रम में। शाम छ बजे से पहले लौट आयेंगे। जो रास्ता हमने चुना वह लगभग 80% पगडण्डी वाला था।Continue reading “कमहरिया और बालकृष्णदास व्यास जी”
Author Archives: Gyan Dutt Pandey
देहात महुआ बीनने में लगा है
बच्चे पॉलीथीन की पन्नियां, महिलाये और पुरुष दऊरी या अन्य कोई बर्तन लिये जमीन पर गिरे पीले फूल बीनते दिखते हैं। भीनी भीनी गंध पूरे वातावरण में बसी है। मेरे तो घर में कमरों में भी, जब हवा तेज होती है तो यह गंध घुस आती है। कुछ फूल बीन लाओ तो उसके आसपास गंधContinue reading “देहात महुआ बीनने में लगा है”
धईकार बस्ती का दऊरी कारीगर
दऊरी की बुनावट देखी मैने। बहुत सुघड़ थी। बांस की सींकें जो प्रयोग की गयी थीं, उनमें कहीं कोई एसा कोना नहीं था जिससे उपयोग करने वाले की उंगलियों में फांस लग जाये। दऊरी का आकार भी पूर्णत:अर्ध गोलाकार था।
