मम, जै, आगा!


नत्तू पांड़े की भाषा में शब्द कम हैं, कारक-विशेषण-सर्वनाम पिद्दी पिद्दी से हैं। क्रियायें तो वैसी हैं जैसे ऊन बुचेड़ ली गयी भेड़ हों।  पर अभिव्यक्ति बहुत है। पूरा शरीर अभिव्यक्ति का माध्यम है। उन्हे हम गंगा किनारे ले कर गये। घर से पैदल गये नत्तू पांड़े। पहले हनूमान जी के मन्दिर पर रुके। श्रद्धाContinue reading “मम, जै, आगा!”

शराफत अली का चित्र


शराफत अली पर मैने एक पोस्ट लिखी थी – शराफत अली ताला चाभी वर्क्स। उसके बाद मेरे एक सहकर्मी श्री राजेश उनसे यह अनुरोध करने गये थे कि वे मुझसे मिलना स्वीकार कर लें। पर शराफत अली नहीं मिले। मैने (बहुत कम) शराफत अली को उनकी दुकान पर देखा है। पर दफ्तर जाते हुये अपनेContinue reading “शराफत अली का चित्र”

यह माही से शुरू हुआ


मैं उस समय अपनी रेलवे की पहली पोस्टिंग पर गया था। मेरा पद था, सहायक ऑपरेटिंग सुपरिण्टेण्डेण्ट, रतलाम। पश्चिम रेलवे पर यातायात सेवा ज्वाइन करने वाले के लिये यह बहुत प्रॉमिजिंग पोस्ट थी। मुझसे अपेक्षा की जाती थी कि मैं न केवल मेहनत करूंगा, वरन अपने काम में आउटस्टैंडिंग प्रमाणित होऊंगा। सन 1986 का प्रारम्भContinue reading “यह माही से शुरू हुआ”

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