अगर इस देश की आत्मा है; तो उसका स्पन्दन महसूस करने वाले लोग शैलेश पाण्डेय जैसे होंगे! कल दोपहर में मैं इलाहाबाद रेलवे स्टेशन गया। शैलेश पाण्डेय ने कहा था कि वे उत्तराखण्ड जा रहे हैं, सो उनसे मिलने की इच्छा थी। 25 जून को शाम संगम एक्प्रेस पकड़ने का कार्यक्रम था उनका। मैने अपनेContinue reading “शैलेश का उत्तराखण्ड के लिये प्रस्थान”
Category Archives: आत्मविकास
ब्लॉग की प्रासंगिकता बनाम अभिव्यक्ति की भंगुरता
पिछले कुछ अर्से से मैं फेसबुक और ट्विटर पर ज्यादा समय दे रहा हूं। सवेरे की सैर के बाद मेरे पास कुछ चित्र और कुछ अवलोकन होते हैं, जिन्हे स्मार्टफोन पर 140 करेक्टर की सीमा रखते हुये बफर एप्प में स्टोर कर देता हूं। इसके अलावा दफ्तर आते जाते कुछ अवलोकन होते हैं और जोContinue reading “ब्लॉग की प्रासंगिकता बनाम अभिव्यक्ति की भंगुरता”
माधव सदाशिव गोलवलकर और वर्गीज़ कुरियन
वर्गीज़ कुरियन की पुस्तक – ’आई टू हैड अ ड्रीम’ में एक प्रसंग माधव सदाशिवराव गोलवलकर ’गुरुजी” के बारे में है। ये दोनों उस समिति में थे जो सरकार ने गौ वध निषेध के बारे में सन् १९६७ में बनाई थी। इस समिति ने बारह साल व्यतीत किये। अन्त में मोरारजी देसाई के प्रधानमन्त्रित्व केContinue reading “माधव सदाशिव गोलवलकर और वर्गीज़ कुरियन”
