अगाध जीवन ऊर्जा के रहस्य


मैं अस्पताल से घर लौटा हूं। कुल चार रातें काटीं मेरी माताजी ने  वहां पर। एक रात में मैं उनके साथ रहा। बाकी तीनों दिन मेरे पिताजी उनके साथ रात में रहे। उनके पास हम एक मोबाइल फोन रख कर आते थे – किसी आपातकालीन संप्रेषण के लिये। मोबाइल फोन उन्हें प्रयोग करना नहीं आता।Continue reading “अगाध जीवन ऊर्जा के रहस्य”

अपने अपने इन्द्रप्रस्थ


जिप्सियाना स्वभाव को ले कर जब मैने पोस्ट  लिखी तो बरबस पॉउलो कोएल्हो की पुस्तक द अलकेमिस्ट की याद हो आयी। (अगर आपने पुस्तक न पढ़ी हो तो लिंक से अंग्रेजी में पुस्तक सार पढ़ें।) उसका भी नायक गड़रिया है। घुमन्तु। अपने स्वप्न को खोजता हुआ मिश्र के पिरामिड तक की यात्रा करता है। वहContinue reading “अपने अपने इन्द्रप्रस्थ”

श्री बुध प्रकाशजी के पूर्वजों की एक पीढ़ी


श्री बुध प्रकाश मेरे जोनल रेलवे (उत्तर मध्य रेलवे) के महाप्रबंधक हैं। सामान्यत: मैं उनपर नहीं लिखता – कि वह कहीं उनकी चाटुकारिता में लिखा न प्रतीत हो। पर वे ३१ दिसम्बर को रिटायर होने जा रहे हैं और ऐसा कोई मुद्दा शेष नहीं है जिसमें मुझे उनकी चाटुकारिता करने की आवश्यकता हो। इसके अलावाContinue reading “श्री बुध प्रकाशजी के पूर्वजों की एक पीढ़ी”

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