“टट्टू पर भारत दर्शन” – क्या शानदार किताब बनेगी अगर उसपर यात्रा की जाये! एक सहयात्री, दो टट्टू और एक फोल्डिंग टेण्ट ले कर निकला जाये। एक दिन में तीस किलोमीटर के आसपास चलते हुये साल भर में भ्रमण सम्पन्न किया जाये! :-)
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बाबा मिल गये उर्फ नागाबाबा जीवन गिरि
लगता है जूना अखाड़ा थोक में साधुओं को सधुक्कड़ी का डिप्लोमा देता है और बाद में उन सबको इधर उधर छोटे-बड़े मंदिरों में खाने कमाने की फ्रेंचाइज भी प्रदान करता है।
मुझे चाय की चट्टी थामनी चाहिये
कई महीनों बाद कटका स्टेशन की ओर निकला। देखा कि स्टेशन रोड पर एक नयी चाय की दुकान आ गयी है। दुकान पर पालथी मारे एक सांवला सा नौजवान, माथे पर त्रिपुण्ड लगाये विराजमान है। भट्टी दहक रही है। पर्याप्त मात्रा में जलेबी छन चुकी है…
