बहुत कुछ सीखना होगा जमुना से। पहला तो यही सीखना है कि रोज 6-8 घण्टा काम करने का रुटीन बनाया जाये। अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सही रखा जाये और जमुना की तरह जीवन का एक ध्येय तलाशा जाये!
Category Archives: ग्रामचरित्र
नन्हकी
नन्हकी संतोषी जीव नहीं है। जो उसे मिलता है, उसे हमेशा कम बताती है। कुछ और या किसी और चीज की मांग करती है। जल्दी हिलती नहीं। हार कर उसे “कुछ और” दिया जाता है।
इस जगत के सुख दुख यहीं भोगने हैं
“यह नहीं हो सकता। इस जगत के जो सुख दुख हैं, वे हमें भोगने ही हैं। निर्लिप्त भाव से उन्हें इसी जगत में ही भोग कर खत्म कर दिया जाये, यही उत्तम है। अन्यथा वे अगले जन्म में आपका पीछा करेंगे। उन्हें आपको भोगना तो है ही।”
