जमुना मोची से चप्पल खरीदी, और सीखा भी!


बहुत कुछ सीखना होगा जमुना से। पहला तो यही सीखना है कि रोज 6-8 घण्टा काम करने का रुटीन बनाया जाये। अपना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सही रखा जाये और जमुना की तरह जीवन का एक ध्येय तलाशा जाये!

राजेश की गुमटी और गांव के सामाजिक-आर्थिक बदलाव


राजेश में विनम्रता भी है। वह अदब से बात करता है। वह सफल हो सकता है। और मैं चाहता हूं कि वह सफल बने। वह गांव (सवर्णों) के जुआरी-गंजेड़ी और निकम्मे नौजवानों की भीड़ से अलग अपनी जमीन और पहचान बनाये। यह आसान नहीं है। पर यह सम्भव है।

“बाबूजी, हम छोटे आदमी हैं, तो क्या?”


फाफामऊ से चन्द्रशेखर आजाद सेतु को जाती सड़क के किनारे चार पांच झोंपड़ी नुमा दुकाने हैं। बांस, बल्ली, खपच्ची, टाट, तिरपाल, टीन के बेतरतीब पतरे, पुरानी साड़ी और सुतली से बनी झोंपड़ियां। उनके अन्दर लड़के बच्चे, पिलवा, टीवी, आलमारी, तख्त, माचा, बरतन, रसोई, अंगीठी और दुकान का सामान – सब होता है। लोग उनमें रहतेContinue reading ““बाबूजी, हम छोटे आदमी हैं, तो क्या?””

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