पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?


रिटायरमेण्ट के बाद जब मित्र भी नहीं बचते (शहर के मित्र शहर में छूट गये, गांव के अभी उतने प्रगाढ़ बने नहीं) तो पठन ही मित्र हैं। दिन भर लिखा पढ़ने में बहुत समय जाता है। पर बहुत व्यवस्थित नहीं है पठन। गांव में अखबार वाला समाचारपत्र बड़ी मुश्किल से देता है। पत्रिकायें नहीं मिलतीं।Continue reading “पुस्तक कब पढ़ी मानी जाये?”

डेढी और लेवल क्रासिंग की जरूरत


डेढ़ी – डेढ़ किलोमीटर लम्बी सड़क जो उत्तर में रेलवे लाइन और दक्षिण में गंगा किनारे के गांव द्वारिकापुर के बीच है और जिसके पूर्व में मिर्जापुर, पश्चिम में भदोही जिले के गांव हैं; के बारे में कल मैने बताना शुरू किया था। मेरा विचार है कि इस सड़क के माध्यम से गांव के जीवनContinue reading “डेढी और लेवल क्रासिंग की जरूरत”

गांव में बिजली समस्या का निदान – सोलर ऊर्जा की शरण से


गांव में शिफ़्ट होते ही मैने 2016 के प्रारम्भ में घर में 1 केवीए का सोलर पैनल लगवा लिया था। पर उसको लगाने के समय यह आकलन किया था कि उस सिस्टम से एक किलोवाट पावर आउटपुट बैटरी को मिलेगा और बैटरी लगभग उतना ही मुझे मेरे काम चलाने के लिये देगी। ऐसा हुआ नहीं।Continue reading “गांव में बिजली समस्या का निदान – सोलर ऊर्जा की शरण से”

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