हेमेन्द्र सक्सेना जी के संस्मरण – पुराने इलाहाबाद की यादें (भाग 1)


सन 1944 में इलाहाबाद “पूर्व के ऑक्सफोर्ड” के नाम से जाना जाता था। दो किलोमीटर के दायरे में विश्वविद्यालय सीनेट हॉल, म्योर सेण्ट्रल कॉलेज, आनन्द भवन और पब्लिक लाइब्रेरी स्थित थे। कहा जाता था कि अगर एक ढेला यहां फेंका जाये तो किसी न किसी महान हस्ती पर गिरेगा।

रेस्तराँ किसको आमन्त्रित करता है?!


नया खुला रेस्तरॉं है श्री विजया फैमिली ढाबा और रेस्तरॉं। … फैमिली के साथ सुकून से बैठ कर जलपान करने के स्थान यहां नहीं हैं। उस जरूरत को पूरा करना चाहते हैं तिवारी पिता-पुत्र।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free