डेढ़ी – डेढ़ किलोमीटर लम्बी गांव की सड़क


वह व्यक्ति नहीं है, गाय गोरू भी नहीं है। वह गांव की सड़क है। उसके एक ओर रेलवे लाइन है। अगर लाइन का अवरोध न होता तो वह नेशनल हाईवे-19 तक जाती। दूसरी ओर द्वारिकापुर गांव है जो गंगा नदी के तीर पर है। कुल मिला कर यह सड़क, डेढ़ी, रेलवे लाइन और गंगा नदीContinue reading “डेढ़ी – डेढ़ किलोमीटर लम्बी गांव की सड़क”

बरसी का भोज और तिरानबे के पांड़े जी से मुलाकात


मैं बरसी  का कार्यक्रम अटेण्ड करने गया था। अनुराग पाण्डेय बुलाने आये थे। अनुराग से मैं पहले नहीं मिला था। उनके ताऊ जी का देहावसान हुआ था साल भर पहले। आज बरसी  थी। भोज का निमन्त्रण था। मैं सामान्यत: असामाजिक व्यक्ति हूं। मेरी पत्नीजी (गांव में बसने के बाद) काफी समय से कह रही हैंContinue reading “बरसी का भोज और तिरानबे के पांड़े जी से मुलाकात”

समय, वर्ग, वर्ण और मैं


गांव में आने पर; उत्तर प्रदेश के सामन्ती अतीत की बदौलत; आसपास जातिगत विभाजन जबरदस्त दिखता है।

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