ब्लॉग की प्रासंगिकता बनाम अभिव्यक्ति की भंगुरता


पिछले कुछ अर्से से मैं फेसबुक और ट्विटर पर ज्यादा समय दे रहा हूं। सवेरे की सैर के बाद मेरे पास कुछ चित्र और कुछ अवलोकन होते हैं, जिन्हे स्मार्टफोन पर 140 करेक्टर की सीमा रखते हुये बफर एप्प में स्टोर कर देता हूं। इसके अलावा दफ्तर आते जाते कुछ अवलोकन होते हैं और जोContinue reading “ब्लॉग की प्रासंगिकता बनाम अभिव्यक्ति की भंगुरता”

फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी


मैं जब भी बोकारो जाता हूं तो मुझे फोड़ (खनन का कोयला जला कर उससे बने फोड़ – हार्ड कोक) को ले कर चलते साइकल वाले बहुत आकर्षित करते हैं। कोयले का अवैध खनन; उसके बाद उसे खुले में जला कर फोड़ बनाना और फोड़ को ले कर बोकारो के पास तक ले कर आनाContinue reading “फोड़ (हार्ड कोक) के साइकल व्यवसायी”

माई बुडि जाब। (माँ डूब जाऊंगा।)


सात आठ लोगों का समूह था। अपना सामान लिये गंगा में उभर आये टापू पर सब्जियाँ उगाने के काम के लिये निकला था घर से। गंगाजी में पानी ज्यादा नहीं था। एक रास्ता पानी में खोज लिया था उन्होने जिसे पानी में हिल कर पैदल चलते हुये पार किया जा सकता था। यह सुनिश्चित करनेContinue reading “माई बुडि जाब। (माँ डूब जाऊंगा।)”

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