धईकार बस्ती का दऊरी कारीगर


दऊरी की बुनावट देखी मैने। बहुत सुघड़ थी। बांस की सींकें जो प्रयोग की गयी थीं, उनमें कहीं कोई एसा कोना नहीं था जिससे उपयोग करने वाले की उंगलियों में फांस लग जाये। दऊरी का आकार भी पूर्णत:अर्ध गोलाकार था।

हनक-ए-योगी


द्वारिकापुर गंगा किनारे गांव है। जब मैने  रिटायरमेण्ट के बाद यहां भदोही जिले के विक्रमपुर गांव में बसने का इरादा किया था, तो उसका एक आकर्षण गंगा किनारे का द्वारिकापुर भी था। यह मेरे प्रस्तावित घर से तीन किलोमीटर दूर था और इस गांव के करार पर बसा होने के बावजूद गंगा तट पर आसानी सेContinue reading “हनक-ए-योगी”

मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस


मानिक सेठ की महराजगंज, जिला भदोही में किराने की दुकान है। नोटबन्दी के बाद उनकी पहली दुकान थी, जहां मैने कैशलेस ट्रांजेक्शन का विकल्प पाया। पच्चीस नवम्बर की शाम थी। नोटबन्दी की हाय हाय का पीक समय। वे पेटीएम के जरीये पेमेण्ट लेने को तैयार थे। मैने अपने मोबाइल से पेमेण्ट करना चाहा पर इण्टरनेटContinue reading “मानिक सेठ और कस्बे में कैशलेस”

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