गणतन्त्र जलेबीतन्त्र


आज गणतन्त्र दिवस की सुबह मुझे जलेबी लाने को आदेश मिला घर में। सामान्यत: साइकिल से जाता था; आज जल्दी थी और अशोक (कार ड्राइवर) उपस्थित था; सो कार से गया। जलेबी की जिस दुकान से आम तौर पर लेता था, वहां भीड़ लगी थी। उसने बताया कि आप को आधा घण्टा इन्तजार करना पड़ेगा।Continue reading “गणतन्त्र जलेबीतन्त्र”

एक जंग सी छिड़ी है व्यवस्था और अराजकता के बीच


एक जंग सी छिड़ी है व्यवस्था और अराजकता के बीच
लोग न केवल स्टिकर निकाल ले रहे हैं, उन बोरियों को उठा कर सड़क के डिवाइडर पर वाहन कुदाने के लिये रैम्प जैसा बनाने में भी प्रयोग कर रहे हैं। … भयंकर अराजक-जुगाड़ देश है यह!

महराजगंज के कस्बाई बाजार पर फुटकर सोच


यह पास का कस्बा – महराजगंज कैसे पनपा? कैसे इसका बाजार इस आकार में आया? यहां रहने वाले पहले के लोग कहां गये? बाजार ने कौन से लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। यातायात के साधन बाजार को किस तरह विकसित करते गये? … ये सवाल मेरे मन में आजकल उठ रहे हैं।

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