विश्व से जुड़े रहने की तलब


इस युग का यही रोचक पक्ष है कि कोने अंतरे में बैठा आदमी भी पूरी दुनियाँ की खोज खबर के लिये दुबरा रहा है। जैसा चीनी कहावत में है कि अभिशाप है रोचक समय में रहना। हम सब विश्व से जुड़े रहने की तलब की रोचकता में अभिशप्त जीव हैं।

दूध एसोसियेशन आई, बाल्टा वाले गये


सवेरे साइकिल सैर के दौरान मुझे आठ दस बाल्टा वाले दिखते थे। घर घर जा कर दूध खरीदते, बेंचते। बचा दूध ले कर अपनी मोटर साइकिल में बाल्टे लटका कर बनारस दे आते थे। उनकी संख्या कम होती गयी। अब तो कोई दिखता ही नहीं। यह बड़ा परिवर्तन है।

राधे सिंह के ढाबे पर चाय


ढाबे वाले सज्जन ने एक डिजाइनर कुल्हड़ में चाय मुझे थमाई और खुद भी एक छोटे सामान्य कुल्हड़ में चाय ली। शायद ढाबे पर सवेरे की पहली चाय थी। सो मालिक जी भी चाय पी रहे थे।

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