दूध एसोसियेशन आई, बाल्टा वाले गये


सवेरे साइकिल सैर के दौरान मुझे आठ दस बाल्टा वाले दिखते थे। घर घर जा कर दूध खरीदते, बेंचते। बचा दूध ले कर अपनी मोटर साइकिल में बाल्टे लटका कर बनारस दे आते थे। उनकी संख्या कम होती गयी। अब तो कोई दिखता ही नहीं। यह बड़ा परिवर्तन है।

मंहगू


वह मुझे साइकिल सैर के दौरान अक्सर मिलता है। एक दिन उसने मुझे रोक कर कहा – आप डेयरी से पाउच वाला दूध लेते हैं। उसी भाव से मैं भी ताजा दूध दे सकता हूं। मेरा दूध उससे बेहतर ही होगा। आपको घर पर ही दिया करूंगा।

बाढ़ू का नाम कैसे पड़ा?


बाढ़ू ने बताया कि सन 1948 की बाढ़ में जन्म होने के कारण उनका नाम बाढ़ू पड़ गया और वही नाम चलता चला आ रहा है।

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