उठो; चलो भाई!


यह एक पुरानी पोस्ट है – बारह जनवरी 2013 की। मैं अस्पताल में भर्ती था। शरीर इण्ट्रावेनस इंजेक्शनों से एण्टीबायोटिक अनवरत भरने की प्रक्रिया से छलनी था। पर उस समय भी मन यात्रा की सोच रहा था।

कुण्डम से जबलपुर – वृहन्नलाओं का आशीष पाये प्रेमसागर


वृहन्नलाओं में सबसे उम्रदराज प्रेमसागर के सिर पर हाथ रख आशीष दे रहा था। भारत में कोई बड़ा काम हो, बच्चा जन्मे या किसी का विवाह हो और हिंजड़े गुणगान कर आशीष दें; वह शुभ माना जाता है।

देवरी से कुण्डम का रास्ता


प्रेम सागर पहले अपने संकल्प में, ज्योतिर्लिंगों तक येन केन प्रकरेण पंहुचने में अपनी कांवर यात्रा की सार्थकता मान रहे थे। अब वे यात्रा में हर जगह, हर नदी, पहाड़, झरने, पशु पक्षियों और लोगों में शिव के दर्शन करने लगे हैं।

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