पहली बार मुझे पता चला कि पलाश या छिउल की जड़ों के रेशे की रस्सी भी बनती है। मजबूत रस्सी। पलाश का हर अंग उपयोगी है। इसके दण्ड को ले कर ही बटुक का यज्ञोपवीत होता है। इसके पत्ते, फूल, फल, छाला – सब का ग्रामीण और वनवासी प्रयोग करते हैं।
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मकर संक्रांति, सर्दी और मैं
खेल खत्म होने के बाद शतरंज की सभी गोटियां – राजा, ऊंट और प्यादा; सब – एक डिब्बे में बंद हो जाते हैं। पर तब भी मुझे अपने को बड़े बाबू के तुलनीय रखना जमा नहीं। क्या कर लोगे जीडी?!
अलाव के इर्द गिर्द चर्चा
पिछली कोरोना लहर की बात चली। बम्बई से आये एक आदमी की बात की राकेश ने। उसको उसके गांव वालों ने घर में नहीं घुसने दिया था। बाहर तम्बू तान कर उसमें रहने को कहा। घर के बर्तनों में नहीं महुआ के पत्तल दोना में भोजन दिया गया।
