रघुनाथ पांड़े कहते हैं – मर जाने पर पूरा इत्मीनान कर लेना। डाक्टर से भी पूछ लेना। कहीं ऐसा न हो कि जान बची रहे। एक चिनगारी छू जाने पर कितना दर्द होता है। पूरी देह आग में जाने पर तो बहुत दर्द होगा। … न हो तो बिजली वाले फ़ूंकने की जगह ले जाना।
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कड़ाहे में बनता – गुड़ और चिनियहवाँ पेड़ा
गांव देस की मिठाई दुकान। मैं नहीं समझता कि बहुत आमदनी होगी चिनियहवाँ (ज्यादा चीनी वाला) पेड़ा और ब्रेड पकौड़ा से। पर सुरेंद्र और उस जैसे गांवदेहात वाले यहां रहने के आराम और रोजगार की जरूरत के बीच झूलते रहते हैं।
पद्मजा पाण्डेय के नये साल के ग्रीटिंग्स
इसमें चीनी पाण्डेय ने बहुत कुछ सीखा। अपने रोज के मिलने वाले, घर में काम करने वालों और आसपड़ोस के बच्चों से जुड़ाव सीखना एक सही बात है! गांव की समझ उससे मजबूत होती है।
