गड़ौली धाम, सगड़ी और सुनील भाई


कुटिया के पास नयी सगड़ी दिखी। हीरालाल ने बताया कि चार रोज पहले आई थी कछवाँ से। “बाबू जी चलावत रहें। बहुत मस्त फोटो आई रही। आपऊ देखे होब्यअ। (बाबूजी – सुनील भाई चला रहे थे। बहुत शानदार फोटो आई थी। आपने भी देखी होगी।)”

रामनवमी – सीता जी क्या बनाती रही होंगी राम जी के बर्थडे पर?


चौदह साल का वनवास। तेरह रामनवमियाँ तो ठीकठाक बिताई होंगी राम-सीता ने वन में। यूं तो यूपोरियन आदमी जन्मदिन टाइप चोंचले में ज्यादा यकीन नहीं करता, पर सीताजी राम जी के जन्मदिन पर कुछ तो विशेष बनाती ही रही होंगी?

गाय, सुनील ओझा और गड़ौली धाम


दीर्घजीवन की सेंच्यूरी मारने की इच्छा शायद मेरे शहरी जीवन त्याग कर इस ग्रामीण अंचल में बसने के निर्णय के मूल में है। हो सकता यही चाह सुनील जी को गड़ौली धाम लाई हो। जो हो; इस शतकीय सोच की एक एक गेंद खेलना और लिखना है!

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