सढ़सठ साल के राजन भाई कोरोना-काल में अतिरिक्त सतर्क हैं


साढ़े चार साल पहले जब मैं रिटायर हो कर गांव में आया था, तो साइकिल भ्रमण के साथी बने राजन भाई। मुझसे उम्र में दो-ढाई साल बड़े हैं, पर मुझसे कम उम्र के लगते हैं। उस समय उन्होने मुझे बताया था कि लगभग 12 किलोमीटर रोज साइकिल चलाते थे। शरीर पर कहीं अतिरिक्त चर्बी नहीं। फ़िट्ट लगते थे।

उसके बाद पाया कि देखने में कुछ तकलीफ़ होने लगी थी उनको। मोतियाबिन्द शायद पहले थे था, पर अब ज्यादा बढ़ गया था। उसके ऑपरेशन के लिये इधर उधर भटके। एक बार डाक्टर तय किया तो पता चला कि डाइबिटीज है उनको और चूंकि कभी नियन्त्रित करने का प्रयास नहीं किया था, ब्लड शूगर ज्यादा ही था। डाक्टर ने कहा कि जब तक वे अपना शुगर लेवल कण्ट्रोल नहीं कर लेते, ऑपरेशन नहीं करेंगे। कण्ट्रोल के नाम पर सेल्फ मेडिकेशन के आधार पर आयुर्वेदिक दवा, करेले का जूस छाप उपक्रम किये उन्होने। पर डाक्टर ने दूसरी बार भी उनका शूगर लेवल शल्य चिकित्सा लायक नहीं पाया।

उसके बाद उनके दोनो बेटों ने, लगता है काफ़ी लताड़ा उन्हे। फिर उन्हें अपने पास दिल्ली ले कर गये। वहां लम्बे समय तक राजन भाई रहे और वापस लौटे तो आँखों का ऑपरेशन करा कर ही।

मेरे साइकिल भ्रमण के साथी राजन दुबे।
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कोविड19 लॉकडाउन काल में चिन्ना पांड़े – रीता पाण्डेय


यह रीता पाण्डेय की अगली अतिथि पोस्ट है –


चौदह अप्रेल, 2020

लॉकडाउन का आज समापन है। पर समापन होगा या यह आगे जारी रहेगा? सबकी नजरें प्रधानमन्त्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी पर हैं कि वे क्या कहने वाले हैं?

घर में साढ़े छ वर्ष की पोती है – चीनी (चिन्ना या पद्मजा) पाण्डेय। वह मोदीजी के राष्ट के नाम सन्देश को ले कर बहुत उत्सुक है। उसकी उत्सुकता इस बात को ले कर भी है कि प्रधानमन्त्री लॉकडाउन खतम कर देंगे या नहीं।

उसका मूल प्रश्न है – “अब हम मार्केट जा सकेंगे?”

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वैशाखी के दिन के विचार – रीता पाण्डेय की अतिथि पोस्ट


रीता पाण्डेय

कल वैशाखी की दोपहर में रीता पाण्डेय ने नोटबुक में लिख कर मुझे थमाया – लो आज लिख दिया। थमाने का मतलब होता है कि लो, इसे टाइप कर पोस्ट करो। आज सवेरे सवेरे लिख कर पोस्ट शिड्यूल करनी है। लॉकडाउन काल में पत्नीजी से किसी टिर्र-पिर्र का जोखिम नहीं उठाया जा सकता। :lol:

पढ़ें, अतिथि पोस्ट –

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