वैशाखी के दिन के विचार – रीता पाण्डेय की अतिथि पोस्ट


लॉकडाउन मौके पर ये सभी सीरियल (रामायण, महाभारत, चाणक्य) टेलीवीजन पर प्रस्तुत करने से आगामी पीढ़ी को एक मौका मिला है कि वे अपनी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास के गौरव को समझ सकें।

आज हवाओं में भी जहर है – रीता पाण्डेय की अतिथि पोस्ट


कठिन समय तो है, पर कठिनाइयों में ही आदमी की क्षमता परखी जाती है। लड़े बिना कोई रास्ता न हो तो आदमी सरेण्डर करने की बजाय लड़ना पसंद करता है। जंग छिड़ी है पूरी दुनियां में और जीतना तो है हीl

हेमेन्द्र सक्सेना जी के संस्मरण – पुराने इलाहाबाद की यादें (भाग 2)


अन्तत: ब्रिटिश राज पर पर्दा गिर गया। हम सभी नेहरू की मशहूर “tryst with destiny” वाला भाषण नहीं सुन पाये, चूंकि हम सब के पास रेडियो सेट नहीं थे। हम सब खुश थे, पर उस खुशी का गर्मजोशी से इजहार नहीं कर रहे थे।

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