चिठेरी (हिन्दी ब्लॉगरी) और विवादास्पद होने का पचड़ा.



ब्लॉगिन्ग की दुनिया की ताकत मुझे तब पता चली थी, जब हजरत मुहम्मद पर कार्टून बनाने के कारण मौत का फतवा दिया जा चुका था. मै वह कार्टून देखना चाहता था. प्रिन्ट और टीवी तो ऐसे पचडे़ में पड़ते नहीं. इन्टर्नेट पर मसाला मिला. भरपूर मिला. ज्यादातर ब्लॉगरों के माध्यम से मिला. ब्लॉगरों के प्रति मेरी इज्जत बढ़ गई.

Continue reading “चिठेरी (हिन्दी ब्लॉगरी) और विवादास्पद होने का पचड़ा.”

नेकी, दरिया और भरतलाल पर श्री माधव पण्डित



भरतलाल शर्मा का केस आपने देखा. हम सब में भरतलाल है. हम सभी अपनी माली हैसियत दिखाना चाहते हैं. हम सब में सामाजिक स्वीकृती और प्रशंसा की चाह है. हम सब समाज के हरामीपन (जो मुफ़्त में आपका दोहन करना चहता है) से परेशान भी हैं. 

जब कभी द्वन्द्व में फसें, तब बड़े मनीषियों की शरण लेनी चहिये.

Continue reading “नेकी, दरिया और भरतलाल पर श्री माधव पण्डित”

हरिश्चंद्र – आम जिन्दगी का हीरो



आपकी आँखें पारखी हों तो आम जिन्दगी में हीरो नजर आ जाते हैं. च्यवनप्राश और नवरतन तेल बेचने वाले बौने लगते है. अदना सा मिस्त्री आपको बहुत सिखा सकता है. गीता का कर्म योग वास्तव के मंच पर घटित होता दीखता है.

आपकी आँखों मे परख हो, बस!

Continue reading “हरिश्चंद्र – आम जिन्दगी का हीरो”

भरतलाल की सगाई



भरतलाल शर्मा मेरा सरकारी भृत्य है. उसकी अस्थाई नौकरी लगते ही गांव-देस में उसकी इज्जत बढ गई. पांच हजार की पगार की स्लिप उसने गर्व से सबको दिखाई. सब परिजन-दुर्जन कर्जा मांगने में जुट गये. उसके भाई जो उससे बेगार कराते थे और उसकी सारी मजदूरी हड़प जाते थे, अब उससे हक से/बेहक से पैसा मांगने लगे. बिना मां-बाप का भरतलाल इतना अटेंशन पाकर कुप्पा होगया. लिहाजा बचत का बड़ा हिस्सा धर्मादे में जाने लगा. जो कर्जा उसने दिया उसे कोई चुकाने का नाम ही नही लेता.

Continue reading “भरतलाल की सगाई”

शेयर मार्केट धड़ाम



उधर चिदंबरम जी बजट भाषण की तैयारी कर रहे थे, इधर शेयर मार्केट दुबला हुआ जा रहा था. मुन्ना का कहना सही है – भैया, बहुत से दिन सांड़ों के होते हैं; कभी कभी तो भालुओं की भी चांदी कटनी चाहिये. मुन्ना धुर आशावादी है. मैं शेयर मार्केट के बारे में बात कर आशावाद का टानिक उससे लेता हूं. मेरा शेयर मार्केट में ज्यादा स्टेक नहीं है, सो थोडा बहुत तात्कालिक घाटा आशावाद के टानिक के लिये अच्छा है. मुन्ना से बात कर मैं अपने स्टॉक की नैसर्गिक मजबूती के बारे में आश्वस्त हो कर ’मस्त’ हो जाता हूं. बजट की चीर फाड़ की जहमत नहीं उठाता.Continue reading “शेयर मार्केट धड़ाम”

‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’, चमगादड और हिन्दी के चिट्ठे



इंटरनेट की जाली पर कई अलग अलग समूहों मे अनेक प्रजातियों के चमगादड़ लटक रहे हैं. ये चमगादड़ तेजी से फल फूल रहे हैं. इनमें से एक प्रजाति हिंन्दी के चिट्ठाकारों की है. उनकी कालोनी का दर्शन मै पिछले दो दिनों से कर रहा हूं.

ये चमगादड़ बुद्धिमान टाइप के हैं. आपस में ‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’ के आलाप के साथ अपनी, जो भी कमजोरियां हों, उनपर से ध्यान हटा रहे हैं. परस्पर प्रशंसा के साथ एक दूसरे की साइट पर क्लिक करने का खेल भी खेल रहे हैं. अपनी साइट कैसे चमकाई जाये कि वह ज्यादा क्लिक हो सके, उसके लिये एक दूसरे का माल चुरा कर अपने चिट्ठे पर चस्पां करने का रोग भी कुछ में है.Continue reading “‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’, चमगादड और हिन्दी के चिट्ठे”

%d bloggers like this: