पार्वती मांझी


गांवदेहात की पार्वती न केवल खुद अपने पैरों पर खड़ी है, वरन अपने साथ 5-6 अन्य को भी रोजगार दिला रही है। क्या खूब बात है! हेलो प्रधानमंत्री जी; आर यू लिसनिंग!

ओम प्रकाश यादव वाचमैन


अब तनख्वाह के रूप में कुछ कम मिलता है। पर ट्रक वाले, भले ही खाना नहीं खाते ढाबे पर, रात में आराम के लिये आसपास रुकने लगे हैं। अधिकतर वे अपना खाना खुद बनाते हैं। पर उनके ट्रकों की देखभाल का काम करते हैं ओमप्रकाश।

बरसात में सुग्गी की सुबह


सुग्गी बहुत वाचाल है। कहती जाती है – “जीजी, बहुत काम है। मरने की फुर्सत नहीं है।” पर फिर भी रुक कर बातें खूब करती है। कई बार तो बातें खत्म कर जाने लगती है तब कुछ और याद आ जाने पर वापस लौट कर बताने-बतियाने लगती है।

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