लॉकडाउन काल में सुबह की चाय पर बातचीत

शैलेंद्र ने कहा – कितनी शांति है दिदिया। लॉकडाउन के इस काल में, घर में किसी की कोई डिमाण्ड नहीं है। सबको पता है कि जितना है, उसी में गुजारा करना है।


यह रीता पाण्डेय की लॉकडाउन काल की आज की नियमित पोस्ट है –


शैलेंद्र दुबे।

कल सुबह मेरा भाई आया था चाय के समय। शैलेंद्र दुबे। मेरा पड़ोसी है। कभी हम उसके घर चले जाते हैँ और कभी वह आता है; सवेरे की चाय पर।

मैंने कहा – मेरा पड़ोसी है। गलत कहा। मेरे परिवार का है। हम दोनों का घर एक परिसर में है।

चाय के साथ कुछ भी चर्चा हो जाती है। घर, गांव, जिला, उत्तर प्रदेश और मोदी। आजकल कोविड19 के चक्कर में परदेश की भी चर्चा होती है। ह्वाट्सएप्प ज्ञान का भी आदान प्रदान होता है।

उसने कहा – कितनी शांति है दिदिया। लॉकडाउन के इस काल में, घर में किसी की कोई डिमाण्ड नहीं है। सबको पता है कि जितना है, उसी में गुजारा करना है। अगर हमेशा सब को अपनी सीमा पता चल जाये और उसी हिसाब से खर्च हो तो कोई समस्या ही न हो।

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